स्याही सफेद है

अहंकार है अंधकार है, सोचा मैं आजाद हूं,
वहम है विभ्रम है, स्याही भी मेरी सफेद है।

अंधकार की वादियों में अंधा इंसान है,
सफलता से पहले हर जगह प्रचार-प्रसार है।

हम टिके रहे हम डटे रहे, हमारा भी स्वाभिमान है,
हम झेले खुद को टटोले, झोली में मिला दर्द और हार है।

भ्रष्टाचार निर्भीक है, भीड़तंत्र में ही सिद्धि है, 
उपलब्धि है, निपुणता है, ये व्यर्थ है क्योंकि स्याही सफेद है।



                                   By~ Pradeep Yadav

Comments

Popular Posts