एक मां है मेरी

बात-बात पर ये दुनिया, हैरान हुई जाती है,
एक मां है मेरी, जो बिना मतलब परेशान हुई जाती है।

यूं तो गर्मी से तप रहा था बदन, कड़कती ठंड में,
हालत जो तुमने मेरी कर दी, मां को नींद नहीं आती है।

मैं भाग रहा था तेरे पीछे, क्या तुझे दया नहीं आती है,
एक मां है मेरी, जो मेरा ख्याल कर जाती है।

हर दिन चीख-चीख के रोया, दूब गया हूं जैसे,
मैं प्यार में मरने को चला, सांस लेना भी लगान हुई जाती है।

ये ज़िन्दगी भी कैसे जी रहा हूं, उसपे मर रहा हूं,
जिसको मेरी याद नहीं आती, एक मां है मेरी,...।


                                     By— Pradeep Yadav

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