अंधकार
इश्क न जाने किस गुमान में है,
यहां सारे अंधकार में है।
प्यार के परिंदे उड़ रहे आसमान में हैं,
शिकायत उनसे नहीं उस खुदा से है।
इश्क गजब का बुखार है,
इसका नहीं कोई इलाज है।
सब से छुपा सकते हो मगर,
वीरान दिमाग में कहीं अंजाम भी है।
By— Pradeep Yadav
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