सैनिक और नेता

जी रहे होंगे कि मर रहे होंगे,
लोग हमें हर तरफ ढूंढ रहे होंगे।

आखरी सांस हम वतन के लिए ले रहे होंगे,
देश की सर-जमीं पे बिताए लम्हे याद कर रहे होंगे।

बदलना चाहते होंगे फैसला, मौत के डर से नहीं,
है कुछ अपने भी जिन्हें हमने, देखा सालों से नहीं।

ज्यादातर लोग दुख में होंगे, कुछ इस बात के दुख मे होंगे,
कुछ फायदे में होंगे इससे, और बाकी फ़ायदा निकालने में होंगे।

हम अगले जन्म में भी इसी देश का ख्वाब देख रहें होंगे,
तुम कहीं और ही इस्तेमाल कर रहे होगे, हम कहीं और ही जान दे रहे होगें।

राहगीर सारे वहीं खड़े मिलेंगे तिरंगा और मोमबत्ती लिए,
देश को लूटते रहेंगे सारे यूंही हिन्दू-मुस्लिम करते हुए।


                                         By— Pradeep Yadav

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