बेवफाई
चाह कर भी नहीं हम याद करना चाहते हैं,
कीमत बेवफाई का कुछ यू चुकाना चाहते हैं।
जिंदगी भर का साथ निभाना था उनको,
मोहब्बत में फना कर के हमें फरार हो गए वो तो।
गम का सिलसिला जारी है जिंदगी में,
मशगूल रहूं या सुबह-शाम खोया रहूं उसके ख्यालों में।
तलब इंतजार का उन्हें कैसे पता होगा,
कि दिए वक्त से पहले जिंदगी में उनके खुशियां भर आए।
इस तड़पते दिल से पूछो तबीयत इसकी,
वरना झूठ तो ये तुम्हारे लिए अपनों से बोल आए।
By— Pradeep Yadav
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