भीख ~ प्यार की

मै प्यार की भीख़ मांग रहा था, बुरे वक्त में साथ था उसके,
अब ख़ुद कि धड़कन के लिए उसका दिल मांग रहा था।
साथ तो पहले से थे, जिंदगी भर का साथ मांग रहा था मैं,
वक्त मेरा लिया, अब वक्त नहीं था यह कह कर टाल दिया था उसने।
मैं उसका सालों से राह देख रहा था, कल दूसरे का हाथ थाम लिया था उसने,
वादे किए थे अनगिनत, पन्ने पलट कर याद दिला रहा था मैं।
बुरा नहीं था मैं, बेहतर बनने की कोशिश में बेकार हो गया मैं,
आजाद कर दिया अब, मैं बुरा नहीं था बेबस हो गया कोशिश कर के।
चाह कर भी वो वापस नहीं आएगी अब, ऐसा काम किया मैं,
बुरा था नहीं मैं, बुरा काम किया मैं।
ख्वाहिशें तो हजार बार मेरी टूटी, उसकी खातिर एक बार और सही,
समाज़ का डर था उसको, क्या दूर हो के जी लेगी वो अब,
ये सवाल किया मैं, उसने मेरा न सोचा और दूर किया खुद से।



                               B   By— Pradeep Yadav

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