दीवानगी
लिहाज़न सूरत-ओ-सीरत पे भीड़ लगी रहती है,
फ़ारिग़ नहीं मग़र सर-ए-मैदान में ज़िंदगी रहती है।
ढो रहा था बस यूँही कुछ वामांदगी का बोझ मैं,
मुझमें करके घर कैफ़ियत यूं तिफ़्लगी रहती है।
वक़्त-ए-मुश्किल में रोशन ज़िन्दगी रहती है,
उसकी आमद से हर शाम शगुफ़्तगी रहती है।
जो कभी दर्द था होंटों पर हँसी अच्छी लगी,
उसकी यादों में हर सुब्ह-शाम रफ़्तगी रहती है।
हर सुबह दुआ बन जाती है उसके ज़िक्र से हिज़्र मेरी,
उसकी खुशबू हवा में बे-शिकस्त-ख़ुर्दगी रहती है।
अब दीवानगी में कुछ इनाम की कमी रहती है,
जहाँ वो बैठ जाए वहाँ मेरी दोशीज़गी रहती है।
फ़ारिग़ नहीं मग़र सर-ए-मैदान में ज़िंदगी रहती है।
ढो रहा था बस यूँही कुछ वामांदगी का बोझ मैं,
मुझमें करके घर कैफ़ियत यूं तिफ़्लगी रहती है।
वक़्त-ए-मुश्किल में रोशन ज़िन्दगी रहती है,
उसकी आमद से हर शाम शगुफ़्तगी रहती है।
जो कभी दर्द था होंटों पर हँसी अच्छी लगी,
उसकी यादों में हर सुब्ह-शाम रफ़्तगी रहती है।
हर सुबह दुआ बन जाती है उसके ज़िक्र से हिज़्र मेरी,
उसकी खुशबू हवा में बे-शिकस्त-ख़ुर्दगी रहती है।
अब दीवानगी में कुछ इनाम की कमी रहती है,
जहाँ वो बैठ जाए वहाँ मेरी दोशीज़गी रहती है।
- Pradeep Yadav
सर-ए-मैदान ~ रणभूमि
फ़ारिग़ ~ free from labour or business, free, at leisure, unoccupied, unemployed, disengaged, not busy
free from care, or anxiety, contented ceasing (from labour), ending, finishing
तिफ़्लगी~ childhood
शिकस्त-ख़ुर्दगी ~ defeatism
शगुफ़्तगी ~ cheerfulness
रफ़्तगी ~ condition of not being in full senses, state of getting carried away, trance, stupor
दोशीज़गी ~ virginity, thoughtlessness, virgo, अल्हड़पन, कुँवारा-पन.
वामांदगी ~ रुके रहने या पीछे रह जाने की स्थिति, थकावट, राह में थककर रह जाना, दीनता, निःसहायता, लाचारी।
Comments
Post a Comment