होकर भी~

तेरे प्यार में डूबा हूँ मैं, तुझसे दूर होकर भी, 
तेरी यादों का सफर है, दिल की धड़कन से होकर भी।
हर लम्हा तेरा ख्याल, जैसे खिला कोई फूल,
तेरी खुशबू से महकता हूँ, हर शाम और हर सुबह होकर भी।
तेरे बिना अधूरा हूँ, जैसे कोई अधूरी किताब,
तेरे बिना मायूस हूँ, हर गीत और हर राग होकर भी।
तू मेरी ज़िंदगी की धुन, मेरी तन्हाई का सहारा,
तेरे बिना वीरान हूँ, हर मौसम और हर बहार होकर भी।
तेरी बातों का नशा, अब तक मेरे होश में है,
तेरी यादों में खोया हूँ, हर दिन और हर रात होकर भी।
तेरी हंसी की गूंज, अब भी मेरे कानों में है,
तेरे प्यार में बसा हूँ, हर लफ्ज़ और हर बात होकर भी।



- प्रदीप यादव

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