हम कभी~

मोहब्बत की बारिश में भीगते थे हम कभी,
ख़्वाबों के वो पल जीते थे हम कभी।
हर लम्हा तेरा ही ख्याल रहता था मन में,
तेरे बिना भी मुस्कुराते थे हम कभी।
वो हंसी तेरी जो रूह को छू जाती थी,
उसके बिना भी गाते थे हम कभी।
तेरी बातों में थी जो मिठास, जादू सा,
उन लफ्ज़ों से दिल बहलाते थे हम कभी।
अब भी यादें तेरी साथ हैं, पर फासले हैं,
कभी एक दूजे में ही समाते थे हम कभी।
वो शामें, वो बातें, वो नज़दीकियाँ,
इन ख्वाबों में बसते थे जिनमें थे हम कभी।


- प्रदीप यादव
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