होती है~
हर सुबह तेरे चेहरे से ऐसे होती है,
जैसे ताजमहल की रौनक होती है।
तेरे हुस्न की तारीफ क्या करें हम,
चाँद की चाँदनी भी फीकी होती है।
तेरे बिना दिल का हाल क्या कहें,
सांसों में भी जैसे ज़रा कमी होती है।
तेरे लबों की मुस्कान को देखूं मैं,
सपनों की भी हकीकत तभी होती है।
तेरी आँखों का जादू कहां बयां करें,
सागर की गहराई में भी जहां खोती है।
तेरे बालों की लहरें जब चलती हैं,
हवा में भी खुशबू बसी होती है।
तेरी महक से महकता है मेरा दिल,
फूलों की भी खुशबू जुदा होती है।
तेरे बिना मेरा दिन भी अधूरा,
रात की भी तनहाई होती है।
तेरे इश्क़ में मैं खोया हूं ऐसे,
जैसे मयखाने में शराब होती है।
तेरी तारीफ में ये ग़ज़ल लिखी मैंने,
हर शब्द में तुझसे मोहब्बत होती है।
- प्रदीप यादव
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