सवाल~
छोटे में उठा सारे सवाल, मिटा दिए ज़िन्दगी के हर हाल,
समझ पाना मुश्किल है, ये ज़माना, इस आत्मा को कौन भला समझा पाए।
ज़िंदगी की राहों में खो गये, बिखर गये हम अपनी तलाश में कई बार,
पाना था ख्वाबों का राज़, पर कहाँ मिलेगा ये गुमशुदा राज़ीनामा कहां ज़मा कर आए।
खो जाती है रातों की चादर, ढलते हुए सूरज की आहट में,
अनजाने सवालों की छांव में, चुभती है हमारी विचारधारा की कोई तो साथ मेरा पाए।
इस भागदौड़ भरी दुनिया में, गहराइयों की खोज में,
कौन बता सकता है असली मकसद, ये दिल को भला कौन समझ पाए।
दिल में समाई हैं बातें, ख़्वाबों के ज़मीर हैं मेरे खोए,
काग़ज़ पर बिखरे हैं ख्यालात, जैसे ज़िंदगी की आईना बनाए।
ये सृजनात्मक रचनाएं, लहराती हैं रसों की बारातें,
उठाती हैं गोदी में शब्दों की लहरें, जैसे कलाकार सारे हो मैंने खुद में बोए।
अनजाने में गुम हो गए हैं, निकल कर शहर से अपने ख़्वाबों के गांव में,
समझ पाना मुश्किल है, ये कहाँ बसा है, ये आत्मा कौन भला समझ पाए।
By— प्रदीप यादव
Azib kasmakas bhari zindgi aur Dil ki gahriyaon ko chhuti hui aapki ye kavita....
ReplyDeleteBehad khubsurat hai ....
Kho jati hai raaton ki chadar , dhalte hue Suraj ki aahat mein...anjaane sawalon ki chhawan mein ...chubti hai hamari vichardhara ki koi to mera sath paaye...😌❤️🌼