जगमगाई~

जबसे हम मिले, उनकी मोहब्बत जगमगाई,
हर नजर में उनकी जदूगरी चाँई।
आँखों ने उनके छूपा लिया हैं आसमान,
उनके साथ बिताए हर लम्हा अमर साँई।

हमसे बहुत हैं अलग, उनकी हैं अद्यायी,
अपार बुद्धिमानी, और छवि दिव्य सी छाई।
बातें हमारी उन्हें पहचानती हैं ख़ूब,
हमसे भिन्न हैं स्वर्ग के अमर खजाँई।

होठों से निकले बोल, मधुरता बरसाई,
दिलों की तारों में प्यार की रात सजाई।
इंतज़ार का रंग चढ़ा हैं मोहब्बत के संग,
यादों की सील पर आज है नाम लिखाई।

हम एक-दूसरे को बनाये हैं कविताओं में,
इश्क़ की धुन में, मंज़िलों की चाह समाई।
ज़िन्दगी की राहों में हमसे मिलती हैं ख़ुशियाँ,
हर ख़्वाहिश पूरी हो, यही हैं दुआई।

बातों में उनके दिल, गीतों में फिर खो जाएं,
लिख के बांटें ये ख़ुशियाँ लम्हों की भरमाएं।
मौसम के रंग सब पाएं इस उम्र के आईने में,
ज़िंदगी के संगीत में हम हर तरफ़ जगमगाएं।


                                                      By — प्रदीप यादव 

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