ग़ज़ल हो~
चाहत के जज्बात से भरी,
दिल की गहराइयों से चमकती ये ग़ज़ल हो।
प्यार की मिठास को छूने वाली,
मोहब्बत के रंगों से सजती ये ग़ज़ल हो।
रूह के आगे चलती ये बातें,
अहसासों के नगमों में गुंजती ये ग़ज़ल हो।
दिल की धड़कनों को सुनाने वाली,
आँखों की मोहब्बत में बसती ये ग़ज़ल हो।
सरहदों को छू जाने वाली,
अपने अनसुने ख्वाबों में जीती ये ग़ज़ल हो।
इश्क़ की लहरों में बहती हुई,
दिल के तारों को छूने वाली ये ग़ज़ल हो।
जज्बातों की उच्छाल और तबाही,
अदाओं की चर्चा में खोई ये गजल हो।
बेवजह जीने की आदत छोड़कर,
सच्ची मोहब्बत का सबूत ये ग़ज़ल हो।
जब आंखों के सामने बस जाए,
उनका चेहरा, उनकी मोहब्बत ये गजल हो।
इश्क़ के सफर में खो जाने वाली,
हर रास्ते में प्यार की छाँव ये ग़ज़ल हो।
By— प्रदीप यादव
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