कहीं हो तुम~
छूपे हुए आंसू की बूंदें गिराती हैं बारिश,
उन आँखों में तस्वीर बनकर हो तुम।
उम्मीदों की किरणें जगाती हैं सुबह,
हर सवेरे में नयी रौशनी हो तुम।
खुशियों की हंसी में घुलता है आदान-प्रदान,
हर मुस्कान के पीछे छुपी हो तुम।
दिलों में पलते हैं आरज़ू रवाँ-दवाँ से,
इस दिल के ख़्वाबों की रूह हो तुम।
हर कदम पल-पल जीती हो तुम,
कहीं सदा तो कहीं ज्यादा हो तुम।
राहत भरी ठंडी हवाओं में आहट हो तुम,
मेरे दिल की धड़कनों की धुन हो तुम।
आशा की किरणों से भरी अभिलाषा हो तुम,
हर ख़्वाहिश में पूरी परिभाषा हो तुम।
बनी रहो मेरी ग़ज़ल का हर गीत प्रिय,
हर क़ाफ़िए के आखिरी में मेरा गुमाँ हो तुम।
आँखों में छाया हुआ उम्मीदों का सपना हो तुम,
खुशबूओं में घुली हुई मोहब्बत की खुशबू हो तुम।
आवाज़ों में बसी हुई मधुर मुस्कान हो तुम,
सदियों से रही हुई वो मधुबन हो तुम।
दिल के धड़कनों का इक सहरा हो तुम,
बहार बने हर गीत से वो संगीत हो तुम।
प्यार की ग़ज़ल बुनी हुई जो एकदम सादे,
मिट्टी की खुशबू की तरह मधुर हो तुम।
अनगिनत सितारों की चमक में छुपी हुई,
सूरज की किरणों की रोशनी हो तुम।
ज़माने की भीड़ में एक ख़ुदी की झलक हो तुम,
प्यार भरी ग़ज़ल जो मुझमें अनकही हो तुम।
By— प्रदीप यादव
रवाँ-दवाँ;
moving, flowing at great speed
सदा;
अरबी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन
आवाज़, ध्वनि, गूंज, नाद, निदा, पुकार, भिक्षुक की आवाज़, फ़क़ीर के माँगने की आवाज़
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