लेख~

जिंदगी जीने निकले थे और रास्ते हजार निकले,
ख़ुदा का शुक्र है की अपने हुनर पे सवार निकले।

हम अकेले नहीं थे इसलिए जरा संभल कर निकले,
क्या जाने किस हमदम के लिबास से तलवार निकले।

इक कामयाबी के पीछे थे और उसपर फ़रार निकले,
नई उरूज के लिए ज़वाल से भी खुद को उभार निकले।

क़लम से या ख़्याल से कह लो मगर बातों में तो,
मिसरे सारे मेरे ही सबसे जुदा और ज़ोर-दार निकले।

मुश्किल लगे तो बता देना ओ काफ़िर इस यार को,
तुम्हारे ना-गहाँ होने से ही मेरे लेख बावक़ार निकले।

                                            By— Pradeep yadav


मिसरे;
line of couplet

उरूज;
ascension, rising, height, Exaltation
बुलंदी, उत्कर्ष
उन्नति, तरक्की, ऊँचाई, वलंदी, उत्कर्ष, उत्थान, उठान।

ज़वाल;
Arabic ; Noun, Masculine
decline, wane, decay, fall
after noon when the sun is on the decline, declination of the sun
harm, loss, injury

काफ़िर;
infidel, impious person, sweetheart, impious
प्रेमपात्र, माशूक़ा, असमर्थ, अपात्र

ना-गहाँ;
unexpected, accidental
अचानक

बावक़ार;
Persian, Arabic ; Adjective
distinguished, prestigious, honorable

Comments

Popular Posts