ज़्यादा है~

मेरे जैसे क्या फुर्सत में है या फुर्सत से कुछ ज़्यादा है,
इश्क़ के आलम में क्या हम ही ज़रूरत से ज़्यादा है,
लिखी हैं कुछ ग़ज़लें मसर्रत में मगर नफ़रत कुछ ज़्यादा है,
बेगुनाही पे नदामत हमको ही हमेशा से कुछ ज़्यादा है।

इस ज़माने में गुम हुआ इक रिश्ता प्यार-प्यार कह के टूटा है,
शायद झूठी निकली है धार वादों की ये बातें फर्जी ज़्यादा है,
उनके पीछे-पीछे फिरने से तो मेरी इक आधी उम्र गुजरी है,
मैंने इश्क़ फ़रमाया है पहले ये ग़नीमत भी कुछ ज़्यादा है।

वो कहीं जान ना ले की ये चांद मेरा शाम से कुछ ज़्यादा है,
मैं खुद को सही भी कहता मगर ये फैसला सारा मेरा है,
मसरूर हूं की रहा मैं उसके साया-ए-शजर में तोहमत ले कर,
मगर मेरा मशवरा रहा खुदसे की मुझे इस रास्ते पे जाना है।

उसको गलत कहूं भी तो कैसे कुछ गलती तो मेरी भी ज़्यादा है,
कुछ गलती तो उसने भी की मगर वो मेरे लिए खूबसूरत ज़्यादा है,
उसकी नजरों में मेरे लिए तो ये नजदीकी भी दूरी से कुछ ज़्यादा है,
अच्छा-अच्छा लिखता मगर शब्द अभी गुलजार से आधा-आधा हैं।

कुछ लफ़्ज़ चुरा के लाया हूं पूरा होते ही तू खुश ज़्यादा हो जाना,
मैं ग़ज़ल ले कर आया हूं की बिन बोले फिर वापस प्यारी हो जाना,
मुस्कान पे तेरी मरता था तेरी जुल्फें फिर से चेहरे पे ज़्यादा हो,
कानों में झुलके और तेरी हसीं पे ये दीवाना वापस घायल ज़्यादा है।

तकल्लुम होती है तो क़ाफ़िए आज भी सहमे से दिखते ज़्यादा है,
हूर जो मैंने देखा है आज ख़्वाहाँ तुम्हारा रदीफ़ से कुछ ज़्यादा है,
तुम्हीं दिल-आज़ार तो कभी परियों सा मेरे ख़्वाब में आया करती हो,
वो दिल कैसा भी हो उस दिल की हिमाक़त अभी भी बहुत ज़्यादा है।

मेरे इश्क़ में घुमाव कम क्या और क्या इंकलाम ज़्यादा है,
जाने फिर किस लिए कलम उठा लूं बाहर मौसम ऐसा है,
उसकी सुंदरता देखे बिना मन भी नहीं भरता कुछ ऐसा है,
हाल क्या बताऊं मैं उसकी सादगी लिख रहा कुछ वैसा है।

मेरी अज़ीज़ है इसलिए उसका एहसास करीब कुछ ज़्यादा है,
मेरे हारने से सुबह होती तो क्या होती सूरत सवाली ज़्यादा है,
कलम और स्याही से क्या मेरे जीतने की उम्मीद ज़्यादा है,
किसी से प्यार नहीं तो उसके जैसा प्यार किससे ज़्यादा है।

मेरे चाहने से साग़र-ए-ग़म में गर्दिश का तूफ़ान कुछ ज़्यादा है,
हाफ़िज़े खुली नज़रों में हैं और मुझे आता याद कुछ ज़्यादा है।



                                                By— Pradeep yadav




आलम;
The Universe/ World/condition/ situation
दुनिया, संसार, विश्व हालत, दशा, हाल

मसर्रत;
happiness
ख़ुशी

नदामत;
regret, repentance, shame
लज्जा, पश्चाताप

मसरूर;
glad, happy, cheerful, delighted

ग़नीमत;
blessings/ boon/ plunder
युद्ध में शत्रु की सेना से छीना हुआ माल, (वि.) उत्तम, अच्छा।

साया-ए -शजर;
Shadow tree

तोहमत;
Allegation, Accuse
false accusation, suspicion of guilt

तकल्लुम;
conversation, talking, speaking, eloquence
कलाम करना, बोलना
अ. पं. बातचीत करना, बातचीत, वार्तालाप।

qaafiye
क़ाफ़िए
rhyme

हूर;
a virgin of paradise, a black-eyed-nymph, a celestial bride promised to all good Muslims in the next world, a fairy

ख़्वाहाँ;
wishing, desiring, soliciting, whether
इच्छुक
चाहनेवाला, इच्छुक माँगने- वाला, याचक।

रदीफ़;
Word, repeated after rhyme
the rhyming letter of a poem

दिल-आज़ार;
दिल दुखाने वाला

हिमाक़त;
foolishness, madness
मूर्खता, मूढ़ता, निर्बुद्धता, बेवकूफ़ी, अज्ञान, जहालत।

इंकलाम;
Revolution

अज़ीज़;
favourite, Dear, Relative, Respected
दोस्त, प्रिय, प्यारा, रिश्तेदार, पसंद, मिस्र का राजा जो ज़ुलेख़ा का पति था
स्वजन, रिश्तेदार, प्रिय, प्यारा, | रुचिकर, मग़ब, अप्राप्य, कामयाब, मिस्र के प्राचीन बादशाहों की उपाधि ।–“मिलने से भी अज़ीज़ है मिलने की आजूं, है वस्ल से ज़ियादः मज़ा इंतज़ार में ॥”-(प्रिय के अर्थ में)

सवाली;
Questioning, a beggar, a petitioner

साग़र-ए-ग़म;
Goblet of sorrow 

गर्दिश;
revolution, circulation, misfortune, wandering about

हाफ़िज़े;
memory









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