मैं हैरान हूं मैं परेशान हूं, सोच में डूबा कई सवालों के साथ हूं,
हम किसी महान का उदाहरण देकर अपनी बातों उसको सही बताते हैं,
क्या खुद पे भरोसा नहीं या ये महान कहीं और से आते है।
क्या सही है क्या गलत है, ये हमें सीखना क्यों पढ़ता है,
जो सही है वही क्यों नही सही रहता है ये गलत कहा से आ जाता है।
मैं हैरान हूं मैं परेशान, ये अंधविश्वास किसी के लिए सही है किसी के लिए गलत,
अब इसमें सारे महान कहां चले जाते हैं, क्यों नहीं इसका कोई उदाहरण बन पाते है।
अजीब है सब कुछ ना जाने क्या चल रहा, एक नोट जिसपे गांधीजी बने,
उसके लिए उसके लिए सब कुछ होता हुआ नजर आता है।
इन प्रोग्रेस....
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