साथ~
मैं बुरा ना था, मैं भला ना था,
टूट कर चाहा पर साथ मिला ना था।
उलझी थी राहें, सिलसिला भी बुरा था,
टूट कर चाहा पर साथ मिला ना था।
किसका हुआ बुरा, किस पर हुआ जुल्म,
किसका हुआ बुरा, किस पर हुआ जुल्म।
किसने किस पर ढाया गज़ब, अब ये बताएगा कौन,
टूट कर जिसको चाहा अब साथ ना मिल पाएगा।
मुसाफिर हूं पर जागीर नहीं यहां ये राहें अपनी नही,
चलें थे उतना ही जितना सफ़र था अपने अब साथ नही।
By~ Pradeep Yadav
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