हारा हूं~
हसीनों का समा है, मेरी शाम भी नहीं,....
मुद्दतों से जिया जा रहा हु, किसी को फिक्र भी नहीं।
आते हैं लोग ले के नशा, कहते है सबको भुला... मैं तो हूं यहीं,
मैं रुकता नहीं.... मैं हार के भी जाने क्यूं... कुछ सीखा नहीं।
मैंने जैसे देखा है सब, पर नशे में अब भी ठीक से कुछ दिखता नही,
ठीक कुछ लगता नहीं,... जीत कभी देखा नहीं,...
मैंने तो हार के भी कुछ सीखा नहीं,... हां, मैं कुछ सीखा नहीं।
कुछ सीखा नहीं,............ हां मैं कुछ सीखा नहीं।
सिर्फ हरा हूं मैं, हार के जिया और कुछ किया नही,
सब टूटे है सब हारे है,. टूट के गिरे, मैं हार से डरा नहीं.....।
मैंने देखी हैं हार, मैंने देखी है जीत....X2
मैं हार के बोला मैं तो सीख रहा अभी।।
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सबको आता है जीना, सबको पता है कौन नाग... कौन सपेरा,
मैं सबको देख लिया अभी,... मतलबी हैं सारे यहां,
आधे जी रहे बिन मतलब आधे हैं दिल पे फ़िदा....।
किसी को नहीं है फिकर, किसी का नही है फिगर,
किसी कलर है ब्लर तो कोई तो कोई है खाई की तरफ।
मैं हारा हूं सबसे क्योंकि मैं हूं खुद से बेखबर,...
सबकी है मंजिल सबका है प्यार,
सबकी है मंजिल सबका है प्यार.....
मैं आगे दौड़ा था जब सबका था साथ,.....जब सबका था साथ।
By~ Pradeep Yadav
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