कैसा ये खेल है~

कैसा ये खेल है जीवन का, बिता कल कभी मिटता नहीं,
आज का कुछ पता नहीं, कैसा ये खेल है जिसका मुझे हिस्सा होना नही।


                                   By~ Pradeep Yadav

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