"ये दिल अब डरता है प्यार करने से"
जब-जब दर्द उभर कर आया,
अपनी कलम से मै टकराया।
जब-जब आंसू पलकों को छूकर निकला,
मेरे स्याही में रंग भर आया।
जब-जब सर उठाकर चलना चाहा,
कुछ लड़कों की करतूतों से सर झुकाया।
जब-जब ये तनहा दिल प्यार चाहा,
हमें दिल की चौखट से लौटआया।
हमने दिल को बहुत समझाया,
लेकीन दिल रोते-रोते थक न पाया।
वक्त ने है सब को बांटा,
थोड़ा अंधेरा है सबका तो धूप है किसी का हिस्सा।
हर रास्ते पे एक नया मोड़ है आया,
क्यों ये दिल ऐसे है रोता कि जैसे मेरे में ही चोर है बसा।
ये दिल न जाने क्यों है रुठा,
मैं ऐसे जैसे गेहूं में है घून पिस्ता।
क्यों न जाने ये सब मेरे संग ही है होता,
दिल आखिर क्यों है उसके बिना बेचैन रहता।
ये प्यार-व्यापार एक ही दिल क्यों करता है,
यहां सब यही करते है फिर न जाने ये दिल क्यों रोता है।
By— Pradeep Yadav
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