सोचा है💔

लोग कहते हैं कैसे लिख लेते हो तुम?
अब वह क्या जाने लिखते नहीं हैं...
बयां करते हैं अपने जज्बातों को हम।
अरे!!! सुनते जाओ...
ये जो दिल में दर्द होता है ना, वह जुबान पर नहीं आता।
हर मुस्कुराता चेहरा भी खुश नजर नहीं आता।
सब भुला कर आगे बढ़ने का सोचा है...
तुझसे ना मिलने का सोचा है।
यह दुनिया बहुत छोटी है हमसफ़र...
अगर टकराए राह में तो नजरअंदाज करने का सोचा है।

                                             By— Pradeep Yadav

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