एक...✍️

जब जाता हूं मैं,
तब आती है तू।
एक उदासी सा रंग हूं मैं,
खुशी सी भरी है तू।
एक लंबे रास्ता सा मैं,
उन रास्तों पर अमिट कदमों सी तू।
एक ढलता हुआ शाम हूं मैं,
उसका उगता हुआ एक भोर है तू।

                        By— Pradeep Yadav

Comments

Post a Comment

Popular Posts