मोहब्बत 🤫

खोल कर रख दूं चिट्ठा पूरा तो किताब बन जाएगी।
पढ़ने वाले भी सोचेंगे कि क्या खूब आग दबाई थी।।
      अरे!!!! एक भड़कती आग पढ़कर जाओ...
  ना जख्म भरे
  ना शराब सहारा हुई
    ना तुम लौटी
  ना मोहब्बत दुबारा हुई...
    
                                 By:— Pradeep Yadav 

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