इश्क़ीया~

जहां इश्क़ रंगीन होता है,
महक उर्दू, सरस उर्दू होता है।
दिल की गहराइयों में बसती है तो,
एहसासों की ताजगी में जीना होता है।

इश्क़ की ग़ज़लें सजती हैं,
उर्दू की नग्मों से लबरेज़ लब्ज़ होता है।
प्यार की बातों को आगे बढ़ाती हैं वो,
दिल को दरियाओं में लहरों का सैलाब होता है।

उनके इश्क़ में है एक क़ैदी दिल,
मोहब्बत में उलझा जज़्बात होता है।
जब होता है ज़िक्र इश्क़ के शब्दों का,
रूह की गहराइयों में बसाये इकरारात होता है।

प्यार की राहों में ख़्वाब उड़ाते हैं,
उर्दू के पखवाड़ों से मुँह छिड़ाता है।
दिल की जज़्बातों को अदांबर देते हैं,
इश्क़ के अनमोल लफ़्ज़ों में अदांबर होता है।


                                                      by— प्रदीप यादव 



सरस - मनमोहक, मनोहारी
लबरेज़ - उबलते, उठते
इकरारात - संवाद, इकरार
अदांबर - गर्व, मंदिर की आवाज़
इश्क़ीया - "प्यार से संबंधित" या "प्यार की भावना से भरा हुआ".


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