कहानी बातें नहीं आती~
आहटें बहुत थीं, पर जुबां पर नहीं आतीं,
ज़ख्मों की कहानी कोई खुदा पर नहीं आतीं।
ज़िंदगी की राहों में उलझे हुए अक्षर,
मायूसियों की किताब में छुपा नहीं आतीं।
गहराईयों में दबी हुई आवाज़ की गूंज,
संगीत के समंदर में बह नहीं आतीं।
बारिश की बूँदों के साथ बहते इर्दगार,
ख्वाबों की छाती पर छांव नहीं आतीं।
अनजान शब्दों के तालों में बँधी ख़ामोशी,
ज़ुबान के बंद दरवाज़े पर नहीं आतीं।
सुलगते दिलों की धड़कनों के सहारे,
बाहर की धुंधली सूरत पर नहीं आतीं।
By— प्रदीप यादव
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