प्यार रोलता है???


सब का देखो संसार की हर चीज़ पे मन डोलता है,
मुद्दत हुई चलता हूं अब घर जा के झूठ भी बोलना है,
ख़्वाब ऐसे देख लिया की मुश्किल में है ये दिल मेरा,
सलीक़े से झूठ अब ये लब कैसे कहेंगे दिल को तौलना है।

जब परिंदे को कोई ज़मीन से परवाज़ में तौलता है,
तो सबसे पहले जहर फकत उसके आंगन में घुलता है,
गिर्हें चाहतों के बांध लिए उसने भी ऐसा ज़माना बोलता है,
मशिय्यत मोहब्बत में आंसू मेरे उसकी आंख से निकलता है।

खैर, रखी रह जायेंगी यादें तिरी दिल के पलड़े में और हम, 
चले थे तिरी घर के आगे अपनी जन्नत की दुकान खोलने,
प्यार के हाथों को बांध देने से रंगों में खून खौलता है,
और भूल गए दिल टूटने पर तिरा नामा-ए-दिलदार खोलना है।।


                                                                           ~ प्रदीप यादव


मुद्दत;
फ़ारसी, अरबी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग
अवधि, कार्यकाल, काल, देर, दीर्घ काल

नामा-ए-दिलदार;
letter or massage of lover, love letter

परवाज़;
फ़ारसी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग
उड़ान, उड़ने का भाव, (प्रत्य.) उड़नेवाला, जैसे--‘बलंदपर्वाज़’ ऊँचा उड़नेवाला।

मशिय्यत;
अरबी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग
ईश्वरेच्छा, खुदा की मर्जी, दैवशक्ति, कुदरत

गिर्हें;
knots
गाँठों

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