क़ैद है~
सुनो पिया इश्क़ के सफ़र में हम फ़ासलों से क़ैद है,
दिल के जुस्तुजू की भेद में हदों के हिसाबों में क़ैद है।
रोज़ खोजता हूं दरमियान ये रूह किसकी मेरे बैद है,
जो हुआ छूकर वो ज़ाइक़े इन उँगलियों में क़ैद हैं।
जिस्म से क़ुर्बतें बादशाहों के शान-ओ-शौकत शैद है,
देखो मोहब्बतों के घर कितनों के मक़बरों में क़ैद है।
वो जो हम कहते थे हमारी आंखों में तिल है जनाब,
वो तिरे तिलों से फैला तूफ़ाँ मेरे साहिलों में क़ैद है।
यूंही ढलते जा रहे ये दिन अब मेरी लकीरें भी हैद है,
तिरे करीब आने को अब घर भी मेरे रतजगों में क़ैद है।
मिला ना कोई इन रास्तों पे जो भला तो कहूं कैसे मैं,
मिल के पिया तुमसे ही इक चेहरा मेरे किताबों में क़ैद है।
By~ प्रदीप यादव
बैद;
मूल : संस्कृत
आयुर्वेदिक चिकित्साशास्त्र को जानने वाला पुरुष, वैद्य
वैद;
physician practising the Ayurvedic system of medicine
शैद;
मूल : अरबी
छल, धोखा, फ़रेब
क़ुर्बतें;
Closeness, Nearness, Together
रतजगों;
waking up all night
हैद;
संज्ञा, पुल्लिंग
किसी चीज़ का उभरा हुआ हिस्सा, उभरी हुई लकीर
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