चेहरा-किरदार ~
हम कलम पकड़ते हैं तो अलग मिज़ाज और रखते हैं तो दूसरे मिज़ाज के होते हैं,
वो क्या है न आज कल लोग एक मुंह पे दो चेहरे और हम दो किरदार लिए फिरते हैं।
By— Pradeep Yadav
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