बहुत~

इक आँसू भी जिनके गिर गए तो दाग़ आए बहुत,
पहले-पहले प्यार में हम भी उनके घबराए बहुत।

फिर हुआ यूं कि उनके प्यार में महकाए बहुत,
वो यूं आए ज़िंदगी में मेरे की हम इतराए बहुत।

कुछ लोगो ने अपने दरीचों पर घाम खाए बहुत,
हम खुशनसीब थे जो हसरत-ए-दीद पाए बहुत।

जब मन हुआ खुद को काम में उलझाए बहुत,
लौटे तो गले लगाकर बोली तुम याद आए बहुत।

जाने कैसे कान के झुमकों को चमकाए बहुत,
रुख़सार-ओ-लब चूम उनपर प्यार बरसाए बहुत।

जाने कितने होंगे जो दिल लगाकर पछताए बहुत,
पहले-पहले प्यार में हम आगे निकल आए बहुत।


                                                 By— Pradeep Yadav 





हसरत-ए-दीद;
desire to see

दरीचों;
window

रुख़सार-ओ-लब;
cheeks and lips

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