ख़ुशी~

हर ख़ुशी तेरे लिए और हर नाख़ुशी मेरे लिए हैं,
एक ख़ुशी के लिए हम कितने गम लिए हुए हैं।

अब क्या बताए उन बादलों को दरिया के बारे में,
बिखरे वहीं हम जहां गोशा-ए-तन्हाई मेरे लिए है।

ये तेवर वाली आखें सजाए रखना ज़माने के लिए,
क़िमार-ए-मोहब्बत में हम हर बार के हारे हुए हैं।

जो लोग भले लगे रानाई लिए लिबास-ए-मुफ़्लिसी में,
उनके मुताबिक़ हम ही और बद-सूरती मेरे लिए है।

हर किसी की तरह ज़ीस्त की वजह पूछना तुम भी,
मोहब्बत में हम लर्ज़िश-ए-सहबा संभाले हुए हैं।


                                          By~ Pradeep yadav




गोशा-ए-तन्हाई;
secluded corner

क़िमार-ए-मोहब्बत;
gamble of love

रानाई;
beauty, grace, tenderness

लिबास-ए-मुफ़्लिसी;
attire of poverty

मुब्तला-ए-सद-आरज़ू;
engaged in hundred desires

लर्ज़िश-ए-सहबा;
shivering of wine





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