ज़ालिमा—
आग में जलते देखे तो बोली आ कर के हमारी भी भुझा दो,
फुर्सत हुई डूब जाने से इश्क़ कर के अब मरने की ख़ता दो।
गुम-गश्ता हो कर के फिर कहती है अपने दिल में छुपा दो,
न लपटों में ले कर के हमको आज़ाद होने की बस रज़ा दो।
हम इतने भी नहीं की कर के तज्दीद-ए-मोहब्बत हवा दो,
न औरों के लिए राह कर के मुश्किल में ये जवानी लूटा दो।
बहुत देखे है कर के मदद मगर मुझको मत ऐसी दुआ दो,
अब जो कर के ही देखनी है तो मेरे ग़ज़ल पे निगाह दो।
हँसी झूटी कैसी होती होगी कर के जरा हमें भी वफ़ा दो,
लबों पर ऐसी हँसी रख कर सर-ए-ज़ख़्म पे मुझे हँसा दो।
तुम ही इक़रार-ए-मोहब्बत कर के चाहे मुझको भुला दो,
तुम चाहो तो इंकार-ए-मोहब्बत कर के मुझको सज़ा दो।
अब उतरा हूं हिम्मत कर के तो तहरीर लो और जला दो,
सज़ा ये बड़ी न लगे कर के तो ज़हराब लो और पीला दो।
By~ Pradeep Yadav
ख़ता;
Arabic ; Noun, Feminine
mistake, error, fault, failure
गुम-गश्ता;
Errant/ Lost
रज़ा;
Arabic ; Noun, Feminine
the state of being pleased, content, pleasure, good pleasure,desire, will, wish,consent,assent
तज्दीद-ए-मोहब्बत;
renewal of love
सर-ए-ज़ख़्म;
the tip of the wound
घाव की नोक
इक़रार-ए-मोहब्बत;
confession of love
इंकार-ए-मोहब्बत;
refusal of love
तहरीर;
Arabic ; Noun, Feminine, Singular
writing, writing elegantly and accurately
writing style, description, a written statement or declaration, a document
minute, composition, deed, bond, agreement letter, contract letter
ज़हराब;
Persian ; Masculine
poisnous water
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