बोल दे
लबों से कहूँ या नज़र बोल दे,
मोहब्बत का कैसा असर बोल दे।
मोहब्बत का कैसा असर बोल दे।
जो चाहत में दिल ने छुपा रक्खा है,
वो बातें ये तेरा सफ़र बोल दे।
मैं लफ़्ज़ों में तुझको समेटूँ कैसे,
ये तेरा बदन, ये हुनर बोल दे।
अगर तुझसे बढ़कर कोई भी नहीं,
तो फिर तुझसे बढ़कर जिधर बोल दे।
मैं चुप भी रहूँ, फिर भी तू जान ले,
तेरे सामने मेरा डर बोल दे।
जो बरसों से दिल में दबी है लहू,
इसे अब तेरी रहगुज़र बोल दे।
नज़र में नज़र से उतरता हूँ मैं,
अगर इश्क़ है तो खबर बोल दे।
- प्रदीप यादव
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