रहगुज़ार~
तुझसे ही ख़ूब बातें करूं तुझसे ही हूं मशहूर भी,
सर-ता-पा तर्ज़-ए-'अमल तूझसे ही इज़हार भी।
हिनाई हाथों में सजाए तो हो इसका इब्तिकार भी,
पाए तिरा साने'-ए-अज़ल सा अक्स-ए-मुस्तआर भी।
अभी तो ख़ुद से मुब्तज़ल कम हूं इख़्तिसार भी,
कोई बताए ला-यज़ल हूं मैं तिरा साज़गार भी।
ये बशर गिरा फर्श पर थककर तो तेरी हवा पूछे की,
कहूं चाहत का जवाब ग़ज़ल-दर-ग़ज़ल इस्दार भी।
शफ़्फ़ाफ़ फ़ज़ाओं में रहूं और रहूं तिरे इहज़ार भी,
हर रोज़ करूं फूलों से मोहब्बत का इज़हार भी।
काँटों से उलझने की इश्क़ में हैं बोहरान और भी,
तिरे सामने सुब्ह-ए-अज़ल न आसमाँ और भी।
दुनिया के आगे हमारा इश्क़ करना है मुस्तशार भी,
इश्क़ के इम्तिहाँ में रहूंगा बैतुल-ग़ज़ल का रहगुज़ार भी।
By— प्रदीप यादव
सर-ता-पा~सिर से पाँव तक, पूरी तरह से, संपूर्णतया।
तर्ज़-ए-'अमल~ आचरण, व्यवहार, शिष्टाचार, कार्यशैली।
हिनाई~ मेहंदी लगा हुआ (प्रायः हाथ-पाँव आदि)
मेहंदी का रंग, मेंहदी लगा कर लाल किया हुआ।
इब्तिकार~नया करना, नवीन करना।
साने'-ए-अज़ल~ जीवन रचयता, ईश्वर।
अक्स-ए-मुस्तआर~ borrowed reflection.
मुब्तज़ल~ ज़लील, घटिया, कमीना, नीच।
इख़्तिसार~abbreviation, synopsis, brevity,
संक्षिप्त करना, कम करना, संक्षेप, कमी, बड़े मज़्मून को काट-छाँट कर छोटा करना।
ला-यज़ल~ जो नष्ट न हो, अनश्वर, अविनाशी, अर्थात ईश्वर, हमेशा रहने वाला।
साज़गार~favourable, agreeing.
बशर~ man, a human being.
ग़ज़ल-दर-ग़ज़ल~ एक ग़ज़ल के बाद उसी छंद या पैमाने पर दूसरी ग़ज़ल कहना।
इस्दार~ Proclamation or implementation of the orders, issuance.
{आदेशों की प्रमुखन (Proclamation) या आदेशों के प्राप्त करने की क्रिया (Issuance) और आदेशों के क्रियान्वयन (Implementation) का मतलब है किसी आदेश या निर्णय की आधिकारिक घोषणा या घोषणा करने की प्रक्रिया जिसमें उसे लागू किया जाता है और उसे प्राकट किया जाता है।"}
शफ़्फ़ाफ़~ बहुत उजला, आर पार दिखाई देने वाला, पारदर्शी, स्वच्छ, उज्ज्वल, चमकदार, निर्मल, शुद्ध, साफ़, द्वेष से मुक्त।
इहज़ार~उपस्थिति, हाज़िरी, मौजूदगी।
बोहरान~ रोग की गंभीरता, बीमारी की असामान्य गंभीरता जो अचानक प्रकट हो या विशेष दिनों में जैसे तीसरे दिन या चौथे दिन (चिकित्सकों का विचार है कि इस परिस्थिती में प्रकृति बीमारी से लड़ती है जिसका परिणाम मौत या स्वास्थ में से कोई एक होता है)
सुब्ह-ए-अज़ल~ वह समय जब सृष्टि की रचना हुई।
इज़्फ़ार~विजय प्राप्त करना, जीतना, विजय, फ़तेह।
मुस्तशार~जिससे सलाह ली जाय, परामर्शदाता, सलाह ली हुई बात, परामशित, सलाहकार, मश्वरा देने वाला।
बैतुल-ग़ज़ल~ ग़ज़ल का सबसे अच्छा शेर।
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