अलम-ए-इश्क़~


क़िस्सा-ए-दर्द ये है की नेकी मेरी मुदारात नहीं,
रू-ब-रू अलताफ़ मुंतज़िर-ए-हू ये मेरा अंदाज नहीं।

लड़ते हैं बिन तलकार के हम-नवा इज्ज़ में तिरे,
तिरी याद मुझसे बहुत लड़ी मिरे अंग इस्तेहफ़ाज़ नहीं।

पहली सी वो फ़ज़ा कर इलाज-ए-दर्द-ए-मोहब्बत में,
सिफ़ात बता कहते हैं हमारा क़ादिर-ए-अंदाज़ नहीं।

अब कौनसा ज़ियाँ-कार उठा तिरा तलबगार बनूं मैं,
बात ये क्या है कि मैं पहले से ज़ाहिद-ए-मुरताज़ नहीं।

धड़कने तिरे भी हैं मोहब्बत मिरे भी किरदार नहीं,
हम वहीं सोख़्ता-सामाँ है या नौ-बहार-ए-नाज़ नहीं।

वा'इज़ कहते हैं बू-ए-गुल में तिरे सफर ख़ास नहीं,
कोई समझे तो काग़ज़-साज़ मिरे ये इंशा-पर्दाज़ नहीं।



                                                              By— प्रदीप यादव 






मुदारात~ एक उर्दू और हिंदी शब्द है, जिसका अर्थ होता है "सुबह का समय" या "प्रातःकाल"।


ज़ियाँ-कार~ उठाने वाला, नुक़्सान या ख़सारा बर्दाश्त करने वाला, घाटा पहुँचाने वाला।


महव-ए-ग़म-ए-दोश~ पिछले जीवन या दुखों के बारे में चिंतित।


अलताफ़~ कृपा, दया, करम, दायालुता, मेहरबानियाँ, आनंद, स्वाद, ज़ाइक़े, कृपा, दया, करम


इंशा-पर्दाज़~ गद्य-लेखक, निबंधकार, साहित्यकार


मुंतज़िर-ए-हू~ waiting for invocation


क़ादिर-अंदाज़~ आँचा-तुला निशाना लगानेवाला, निशानची, लक्ष्यभेदी, शब्दभेदी ।


इज्ज़~ असमर्थता, बेबसी, कमज़ोरी, नाताक़ती।


काग़ज़-साज़~ काग़ज़ बनाने वाला


वा'इज़~ धर्मोपदेशक, प्रचारक, धार्मिक या नैतिक उपदेश देने वाला व्यक्ति, प्रवचन देने वाला


इलाज-ए-दर्द-ए-मोहब्बत~ cure for anguish of love


सिफ़ात~ 'सिफत' का बहु०, गुण, खूबी, लक्षण, (प्राचीन) हालत, स्थिती


इस्तेहफ़ाज़~निरीक्षण करना, निगरानी करना, निगरानी, सैंतना, सँभाल कर रखना।


ज़ाहिद-ए-मुरताज़~ बहुत ज़्यादा तपस्या करने वाला।


सोख़्ता-सामाँ~ तहस-नहस, तबाह, कंगाल, दरिद्र।


नौ-बहार-ए-नाज़~ महबूब , प्रेमिका


बू-ए-गुल~ फूल की सुगन्ध/ख़ुशबू


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