देख तिरी यादों में ~
मैंने जब पूछा मौसम-ए-गुल पुकार उसको,
मुख़्तलिफ़ आवारगान-ए-'इश्क़ पे उतार दिए।
फ़लक की सम्त में ऐलान अख़्तर-शुमार हुआ,
और तिरी इक नज़र में मोहब्बत-गुज़ार दिए।
ज़ाहिर है मेरी तरब्बत का मारतब तुझको,
देख तिरी यादों में दरख़्त ही उम्र गुजार दिए।
वक़्त की धूप में आबशार आबरू बेक़रार थे,
धूप की हवस पड़ी रुख़ पर की रंग उतार दिए।
तिरी ख़ुशबू ने मेरे दिल को छू लिया मरकज़ से,
देखो कैसे ख़यालात इश्क़ कहानी की पसार दिए।
हुस्न-ए-रंगीं देख जलते दिल को शांत किया,
तिरे यादों में खोकर जिस्त की दास्तान दयार दिए।
वक़्त की रोशनी में आबशारों ने खो दिया इज़्ज़ार,
बिताए पलों को जब खत तिरे ताइरक-ए-बहार दिए।
वो नज़ारे आँखों में लिए फ़सील-ए-शब तोड़ दिए,
तिरी दिल-ए-सोज़-आशना में इबादत-गुज़ार दिए।
जब दिल की धडकनों ने सुना तिरी आवाज़ तो,
ख्वाबों में हम खुद ही सुपुर्दगी तुझे हार दिए।
सुर्ख़र्शों से राह तकते हुए दिल बे-गुनाह हुआ,
दिल में तिरी धडकनें और भी बेहतर बसार दिए।
By— प्रदीप यादव
मुख़्तलिफ़— "अनेक प्रकार का, कई प्रकार का, पृथक, अन्य, परस्पर-विरोधी, विभिन्न, अलग-अलग, भिन्न, भांति-भांति, अनमेल, बेमेल, बेजोड़"।
आवारगान-ए-'इश्क़—"प्रेम में फिरने वाला"।
अख़्तर-शुमार—"ज्योतिषी, खगोल शास्त्री, फलित ज्योतिषी"।
तरब्बत— "मोहब्बत" या "प्रेम"।
मारतब— "स्तर", "पदवी", या "मान"।
आबशार—झरना, निर्झर, प्रपात, जल-प्रपात, गिरावट, पत्थर या धात का छलनी नुमा फ़व्वारा, मोतियाबिन्द, जाला, पतन"।
मरकज़— centre
हुस्न-ए-रंगीं—flashy or many splendoured beauty
ताइरक-ए-बहार— वो चिड़िया जो चहचहाती हुई वसंत ऋतु के आगमन का शुभ समाचार लाती है और अचानक ग़ायब हो जाती है।
फ़सील-ए-शब— boundary of night
दयार— घर अथवा मकान, भूखंड, आस-पास का क्षेत्र या स्थान, प्रदेश, देश, मुल्क, शहर, जन्म स्थान।
दिल-ए-सोज़-आशना— heart acquainted with passion, burning
सुपुर्दगी—"सौंपना, हस्तांतरण हवालगी, किसी को सौपने की क्रिया, सुपुर्द करने की अवस्था, किसी को देना, हवाले करना।"
बसार— "आवास, निवास"।
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