मोहब्बत- ए- ज़र्रा~
मोहब्बत की ज़द में उतरी मोहब्बत की आग,
जैसे जाम-ए-हुनराँ से उबलता ज़र्रा।
बिना मिले भी महकती है हवाओं में उसकी ख़ुशबू,
जैसे मोती की तन्क़ीद-ए-हुस्न कर देती है, वोही सरसरा।
खुशबू बनकर फैली वो आँखों में,
रूह में महकता सर्फ़-ए-निगाह-ओ-आह, वोही ज़र्रा।
वो रूप की रौशनी में छुपे हैं दर्द-ए-ज़िंदगी के राज,
उसकी आँखों की गहराईयों में बसा, वोही सरसरा।
सरहदों को भी छू लेती वो दीदार सिर्फ़,
बस एक झलक में मिला मेहर-ओ-माह, वोही ज़र्रा।
उसकी आँखों में छुपा है रहस्य ज़िंदगी का,
मिलने से बढ़ गया जिस्त मेरा, वोही सरसरा।
वो ज़िंदगी की धड़कन, आज भी उसका,
दिल की गहराइयों में रू-ब-रू, बस वोही ज़र्रा।
प्यार के राज़ में बसी हैं ख्वाबों की बातें,
उसके जहान-ए-सौत-ओ-सदा, वोही सरसरा।
बसी वो मेरे दिल में, रातों की चादर में,
आँखों में चमकते तारे वोही जुस्तुजू, वोही ज़र्रा।
दिल की तस्वीरों में बिखरता है उसका चेहरा,
मौन से बयां करूं कहानी गुलशन-परस्त, वोही सरसरा।
ज़ुल्मतों में बसी वो मेरी रौशनी,
दिल की धड़कन की ताजगी, बस वोही ज़र्रा।
उसकी मोहब्बत में खो जाता हूँ मैं खुद को,
जैसे मधुशाला में उलझता बूंद, वोही सरसरा।
ज़र्दज़ी की राहों में गुम हो जाता हूँ,
मोहब्बत का सफर बे-सबात हो रहा, वोही ज़र्रा।
वो इश्क़ का आलम बसा है उनकी हँसी में,
जैसे फूलों की महक से भर जाता है, वोही सरसरा।
आँखों की महक, ज़ुबान की तलवार पे फ़ना हुए,
काग़ज़ नक़्श-ए-कुहन बढ़ रहा जो, वोही ज़र्रा।
By— प्रदीप यादव
"ज़द" एक उर्दू शब्द है जिसका मतलब होता है "आदि," "आवश्यकतानुसार," या "मूल रूप से"।
"जाम-ए-हुनराँ" एक उर्दू मुहावरा होता है जिसका अर्थ होता है "कला का पियाला" या "कला की बोतल"।
"ज़ुल्मत" उर्दू शब्द है जिसका अर्थ "अँधेरा" या "गहराई" होता है।
"ज़र्रा" एक उर्दू शब्द है जिसका मतलब होता है "बूँद," "टुकड़ा," या "अत्यंत छोटा हिस्सा"।
"सरसरा" एक उर्दू शब्द है जिसका मतलब होता है "धीमे धीमे," "लब लब पे," या "सहजता से"।
"ज़र्दज़ी" एक उर्दू शब्द है जिसका अर्थ "विरह" या "दूरी" होता है। यह शब्द आमतौर पर प्यार और मोहब्बत की दूरी को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है।
जहान-ए-सौत-ओ-सदा—
world of sound and call
सर्फ़-ए-निगाह-ओ-आह—
employing or strategy
मेहर-ओ-माह—
सूरज और चाँद, अर्थात दुनिया की विशेष वस्तुएँ, मुख्य लोग
तन्क़ीद-ए-हुस्न—
critism of beauty
गुलशन-परस्त—
worshipper of garden
बे-सबात—
अस्थायी, क्षणसाथी, अल्पकालिक, कमज़ोर, बोदा
नक़्श-ए-कुहन—
पुरानी छवि अर्थ: पुराना विश्वास, पुरानी कहावतें या रिवाज, पुरानी शैली के साथ-साथ प्राचीन इमारतें आदि।
Comments
Post a Comment