उम्मीदें ~

एक लड़का आसमानों की ऊँचाइयों की तलाश में था,
दिल में जलती थी जो अधूरी ख्वाहिशों की वो आग में था।

खुद के दरमियान छिपी थी उम्मीदें और वो उसी के आस-पास में था,
चंद सितारों के संग में थी जंग जबकि वो बस इक रात का था।

मुख़्तलिफ़ थी उम्मीदें या मोहब्बत शब-ए-ग़म से आज़ाद में था,
मेरे दिल की गली में प्यार के रंग न आए ख़ुम-ओ-साग़र उदास सा था।

जो था उसकी जुबां पर वो एक अलग ही तकद्दुन किस्सा बहार का था,
कागज़ पर बिना शब्दों के लिखता हर कोई फिर खुदा का खुद क्या था।


                                                                                 By—प्रदीप यादव




मुख़्तलिफ़— अनेक प्रकार का, कई प्रकार का, पृथक, अन्य
परस्पर-विरोधी, असंगत, विभिन्न, अलग-अलग, भिन्न।

शब-ए-ग़म— जुदाई की रात, दुख भरी रात।

ख़ुम-ओ-साग़र— मटका और प्याला,...
ख़ुम— पानी अथवा मदिरा का मटका, शराब रखने का पात्र, घड़ा, बड़ी हांडी, पीपा, दारू की भट्टी, भबका।

मद्दिल— दिल।

लबता— अदृश्य, छिपा हुआ।

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