जनाब~

दिल अंदर है या बाहर है मेरे सीने के,
रोज़ ही सांस फूल जाती है हंसते हंसाने में,
मुसव्विर को बुला लाए की अच्छे दिखेंगे जनाब,
हम वो शख़्स थे जो पहनकर कपड़े पुराने निकल आए।


                                                            By— Pradeep Yadav 



मुसव्विर;
Arabic ; Noun, Masculine
painter, photographer, sculpture

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