समझते होंगे~

क्या पता क्या-क्या अपना वो मक्सूब सुपुर्द-ए-ख़ाक करते होंगे,
इश्क़ में ये बहके आशिक़ क्या ख़ाक राह-ए-शौक़ समझते होंगे।

मिरे गुलशन उभरे-उभरे हैं की गिरेबाँ से सद-चाक उलझते होंगे,
रसिक समझे हैं जबकि वो हमें रबाब के रफीक समझते होंगे।

सारे गुल भी गुलज़ारों सा ख़ूब ख़ुशबू तिरे बदन पे बरसते होंगे,
इश्क़-मोहब्बत अफ़वाह है तो ये ख़ूब अफ़लाक समझते होंगे।

किसने सोचा था की जो साहिब-ए-इदराक झलते होंगे,
आपके दख़ल से वो खुदको अब ख़ाक समझते होंगे।

डूबेंगे यक़ीनन इसी गहराई में इक दिन ये पता था हमें,
कितने इसको सफ़र-ए-मोहब्बत बेबाक समझते होंगे।

दिल तोड़ने वाले इसमें खुदको ख़ूब सफ़्फ़ाक समझते होंगे,
भड़काएँ आँखों से प्यास रुबूब खुदको पैराक समझते होंगे।

शहर-ए-हवस के सौदाई ख़ुद आए जिनकी रूहें नंगी थी,
मोहब्बत-मोहब्बत है कुछ इसे मौहूब शीशाक समझते होंगे।

आइना देखूँ तो अब चेहरे भी सांसों में इम्लाक कसते होंगे,
मजरूह हूं इश्क़ में महबूब इसे इस्तेहकाक समझते होंगे।

वाक़िआ' ये बहुत पहले मख़मली होंटों पे उलझी साँसों का है,
बस नासेह अबस ही इश्क़ को मज्ज़ूब खुराक़ समझते होंगे।

मख़मली बोसों की नमी ठहरी रही तिरा महजूब समझकर,
तब्सिरा करते रहे डूबते हुए और लोग अफ़्लाक समझते होंगे।

अक्सर ये तिरी चेहरे की ग़ुरूब से मा'यूब खूब हँसते होंगे,
अदाएं देखे की हम भी आफ़ताब के तैराक समझते होंगे।

लोग समझते हैं जो कुछ वो ये नक़ाब उनका समझते होंगे,
चाँद कहते हैं जिन्हें हम वो ख़ूब अब हलाक समझते होंगे।

रूह की शाख़ से हुए तिरे और मत्बूब लिए सादगी फिरते हैं,
क़फ़स में कैद इसे कुछ मंसूब सा मुश्त-ए-ख़ाक समझते होंगे।

सुब्ह-शाम साहिल पे तिरे-मिरे सारे ख़्वाब भी नम-नाक समझते होंगे,
खूबियों में तिरे-मिरे सारे मक्तूब सहरा-ए-वहशत-नाक समझते होंगे।



                                                                            By— प्रदीप यादव 



सफ़्फ़ाक ~ ख़ून बहाने वाला, रक्तपात करने वाला, कत्ल करने वाला, रक्तपाती, निष्ठुर, बेरहम, अत्याचारी, ज़ालिम, निर्मम, निर्दयी, हत्यारा, ख़ूनी।
(संकेतात्मक) प्रेमिका, महबूब, दिलरुबा, दिलदार।
साहिब-ए-इदराक ~ बुद्धीमान, विद्वान
रुबूब ~ गाढ़े रस, रुब की जमा
झलते ~ fanned
ग़ुरूब ~ डूबना, किसी तारे का विशेषतः सूरज का डूबना, अस्त होना, सूरज या चाँद का डूबना, पतन होना।
पैराक ~ वह जो पैरने की कला में कुशल हो, तैरने वाला, तैराक।
इस्तेहकाक ~ खुजली, चुल, खुजलाना।
सद-चाक ~ जो बहुत जगह से फटा हो, जो टुकड़े-टुकड़े हो।
हलाक ~ ध्वस्त या नष्ट किया हुआ, मारा हुआ; हत, मरना, हत्या, दुर्घटना में मृत्यु।
मा'यूब ~ लज्जाजनक, लज्जाप्रद, निकृष्ट, दूषित, खराब, बुरा, दोषपूर्ण, दोषी, अरोपयुक्त।
ख़जिल ~ लज्जित, शर्मिंदा, पश्चात्तापी, नादिम, संकोच, पशेमानी, बोझ तले दबना, लज्जा, शर्म, लाज।
मजरूह ~ घायल, आहत, ज़ख़्मी, चोट खाया हुआ, क्षत (लाक्षणिक) प्रेम में गिरफ़्तार (लाक्षणिक) वह बयान जो अस्वीकार्य हो।
इम्लाक ~ संपत्ति,जायदाद, किसी को किसी वस्तु का स्वामी बनाना, मालिक करना।
शीशाक ~ चार तार की वीणा या रबाब।
रसिक ~ प्रेमी।
रफीक ~ मित्र, सखा, सहचर।
रबाब ~ harp, एक प्रकार की सारंगी।
मौहूब ~ भेंट स्वरूप दिया गया, उपहार स्वरूप दिया गया, भेंट स्वरूप, किसी के नाम जायदाद लिख देना, भेंट की गई वस्तु।
अफ़लाक ~ आकाश समूह, सब आसमन।
तब्सिरा ~ किसी किताब या पत्रिका आदि को पढ़कर उसकी ख़ूबी या त्रुटि के बारे में राय देना, किसी बात के बारे में अभिव्यक्ति।
अफ़्लाक ~ skies, heavens
नासेह ~ प्रवचन या उपदेश देने वाला।
'अबस ~ बेकार, व्यर्थ, निरर्थक, फ़ुज़ूल, अकारण, निर्लज्जता, बेहूदगी।
मज्ज़ूब ~ जो जज़्ब हो गया हो; जो सोख लिया गया हो, मजनूं, पागल, दीवाना, किसी विषय में डूबा हुआ, तल्लीन, तन्मय।
महजूब ~ जो परदे में हो, जो छुपा हो, लज्जित, शर्मिंदा, झेंपा हुआ, वह व्यक्ति जो ईश्वर को याद न करता हो, वह जिसे कोई विरासत न मिले या जिसका कोई छोटा हिस्सा हो।
मक्सूब~ कमाया हुआ, पैदा किया हुआ।
मत्बूब ~ जिस पर जादू किया गया हो।
राह-ए-शौक़ ~ प्रेम-लालसा का पथ।
मुश्त-ए-ख़ाक ~ (शाब्दिक) मुट्ठी भर मिट्टी, मिट्टी की मुट्ठी, मिट्टी की चुटकी, (सांकेतिक) तुच्छ, अर्थात: मनुष्य, आदमी, (लाक्षणिक) संसार।
क़फ़स ~ (पक्षियों का) पिंजरा, कबूतरों का दरबा जो बाँस की खपच्चियों से बनाते हैं, जाल, फंदा, (लाक्षणिक) मिट्टी को शरीर, शरीर।
मंसूब ~ संबद्ध, किसी के नाम से जुड़ा होना, जिस से सगाई हुई हो, मंगेतर, सम्बन्धित, जिसकी किसो की ओर निस्बत की गयी हो, जिसकी कहीं मँगनी की गयी हो, सम्बन्धित, जिसकी किसो की ओर निस्बत की गयी हो, जिसकी कहीं मँगनी की गयी हो।
सहरा-ए-वहशत-नाक ~ frightful,dreary desert
मक्तूब ~ चिट्ठी, पत्र, लेटर, प्रकाशित चिट्ठी, पत्रों का बंडल या लम्बा काग़ज़ जिसमें बहुत से पत्र जोड़ या संकलित कर दिए जाएं, पत्रों का एलबम (अधिकतर पुराने ढंग के पत्रों में बच्चों को क़लम से लिखी हुई लिपी का अभ्यास कराने के लिए प्रचलित और प्रयुक्त हों)

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