मुरादों में~

भीनी ख़ुशबू तिरे चेहरे की मुज़्मर है यादों में,
शेर कहे नज़्म लिखे और ख़त मिले सितारों में।

खींच लेते लकीर और थाम लेते सांसों में,
पकड़ा हाथ तो बिजलियाँ भर गई हाथों में।

तुझी को याद किया आह, राह और निगाहों ने,
तिरे वफ़ा-सुकून तबाह हुए फिर मिरे गुनाहों में।

छोड़ गई जब उम्मीदें हाल भरे बला-कशों में,
ज़ेबो में था शहर और ख़्वाब थे साएबानों में।

फिर क्यों न रोका शनासों ने उन ख्यालों से,
सारे दरवाज़े क्यूं खुलते लगे शमशानों में।

कोई लज़्ज़त नहीं पूछे फिर यारी-यारो में,
मुक़ाबिल न रहा ये रूनुमा खुदके हिसारो में।

ये दिल कहा शराबों में या लम्स थे सराबों के,
कहा हुज़ूर कहाँ आए दिल-शिकस्तों के मिनारों में।

ख़लील लौटे अख़्लाक़ लिए इश्क़ निसाबों में,
मिले की बोले ग़र बिछड़े कभी तो ख़्वाबों में।

मुंह से लगाए और मिठास खो गई गहरे ग़ारों में, 
परख थी नशीली गुल-रुख़ों से हारे फिर इशारों में।

यक़ीनन उम्र लम्बी लगी दिखी माह-पारों में,
मिटी ख़ामियाँ जो रहती थी दीवार की दरारों में।

गोद में तिरे करीब आए न फ़र्क मिला कोई पारो से,
इश्क़ होते हैं कई फिर हुआ तो भर लिया बाहों में।

अज़ीज़ लगी जब मुड़कर आई सुर्ख़ इरादों से,
शहज़ादों सी दिखी रातें 'प्रदीप' जिया मुरादों में।


                                                            By— प्रदीप यादव 


 


भीनी ~ भीना की स्त्रीलिंग, हल्की, ख़फ़ीफ़, मद्धम, ख़ुशगवार, मन के अनुकूल
मुज़्मर ~ गुप्त, छिपा हुआ, पोशीदा, छुपी हुई, दिल में छुपा हुआ
साएबानों ~ shade, sheds
बला-कशों ~ afflicted, miserable
तीरगी ~ अँधेरा, अंधकार, तिमिर, गदला पन, धुनदला पन, स्याही
शनासों ~ Knowledgeable; knowers
रूनुमा ~ प्रकट होना, घटित, मुंह दिखाने वाला
हिसारो ~ circles
ख़लील ~ सच्चा दोस्त, मित्र, सखा, दोस्त, पैग़म्बर मोहम्मद की उपाधि, सच्चा दोस्त
अख़्लाक़ ~ Virtue, Piety, Exemplary Conduct
निसाबों ~ curricula, texts, syllabus
दिल-शिकस्तों~ defeated heart
सराबों ~ mirage, illusion
लम्स ~ स्पर्श, छूना, मैथुन, सहवास, पार्श्वभूमि
भाव, संबंध
मुरादों ~अरबी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग, बहुवचन
इच्छा, कामना, अभिलाषा, आशय, उद्देश्य, मक्सद, मन्नत, मानता
माह-पारों ~ moon-faced
गुल-रुख़ों ~ exquisite beauty
ग़ारों ~ गुफ़ा वो भी गहरी वाली 

Comments

Popular Posts