"खुशियों की घटाएँ"
खुशियों का जहाँ अपने संग लाये हो,
जो तुम तारों की मिशअले चुराएँ हो।
जीवन की धुन में जो रंग भरते आए हो,
उन्हें दिल से लगाकर सुना जाएँ हो।
तुम्हारे बिन मेरी ज़िंदगी उदास थी,
हर सुबह नयी उमंग से मुझे सजाएँ हो।
मेरे खुशियों के आसमाँ में जो आए हो,
जबसे मुझमें तुम हँसकर समाएँ हो।
रात दिन अपनी उम्र मुझमें बोएँ जो,
सुना है दोस्तों में मेरी क़स्में खाएँ हो।
खुशियों की सितारों का जो तान हो,
उससे अपनी ओर खींच ले आएँ हो।
दिल को तितली बनाकर हँसाएं हो,
मुझे अपना शरीक-ए-दर्द बनाएँ हो।
जिस तरह ये खुशनुमा पल लाये हो,
मिरे सर पे जैसे खुशियों की घटाएँ हो।
By— प्रदीप यादव
मिशअले;
blaze, lamp, torch
शरीक-ए-दर्द;
joined in pain
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