मोहब्बत दिखी—
पीरी से देखा तिरी ओर तो मोहब्बत की कोई निसां नहीं दिखी,
पिछले दिनों देखा था जो उससे कोई सूरत शय हसीं नहीं दिखी।
पिछले दिनों देखा था जो उससे कोई सूरत शय हसीं नहीं दिखी।
माह-ए-कामिल जो देखा तो फिर कोई दूसरी ख़ुल्द-ख़ुल्द नहीं दिखी,
रुख़्सार पर हंसी जब बिखेरी तो रंज भी कोई मुसीबत सी नहीं दिखी।
मैं खुश हूं की ख़्वाब में तिरी आरिज़ पे कोई सा हाथ रखा था,
हर उमंग सुलानी पड़ी क्योंकि मोहब्बत में हूं और मोहब्बत नहीं दिखी।
देखो तो दयार-ए-इश्क़ में हैं मगर मसाफ़त के बाद भी कोई हद नहीं दिखी,
ये भी सच है की अफ़्लाक तक नज़रे गई मगर कोई तिरी जैसी रफ़ीक़ नहीं दिखी।
बेशक तुझ सा नक़्श देखा होगा पर मुस्कुराती कभी कोई गुलनार नहीं दिखी,
आखें और जुबां सलामत नहीं तिरी तारीफ़ करने को फिर भी कोई आफ़त नहीं दिखी।
सद-शुक्र है ए-खुदा तुझे तो मोहब्बत दिखी कोई गलत निय्यत नहीं दिखी,
'यादव'-ए-मय-ख़्वार की निगाहों में वो चेहरा और चमक सबको नहीं दिखी।
By— Pradeep Yadav
पीरी;
Persian ; Noun, Feminine
authority, power, old age, status of a saint, shrewdness, cunningness
शय;
things/ objects
refuge
चीज़
हसीं ;
beautiful
माह-ए-कामिल;
the full moon
ख़ुल्द;
Arabic ; Noun, Masculine
abode or the state of perpetual existence, eternity, Paradise,a mole
रुख़्सार;
Persian ; Noun, Masculine
cheek
metaphorically: face, countenance
रंज;
grief, sorrow, distress, trouble
आरिज़;
cheek
गाल, कपोल, कपोल, गाल, रुखसार, बाधक, रुकावट डालनेवाला।
दयार-ए-इश्क़;
domain/ realm of love
मसाफ़त;
Arabic ; Noun, Feminine
distance,interval, period,time
अफ़्लाक;
skies, heavens
रफ़ीक़;
friends/ companions
गुलनार;
pomegranate flower.
सद-शुक्र;
a hundred thanks, extreme thankfulness
'यादव'-ए-मय-ख़्वार;
Pen name- yadav, the wine drinker
Comments
Post a Comment