प्यार~

खाली कलम को खास यादों की स्याही से भरते रहे है,
छोटे से ज्यादा बड़े गुनाहों के झोंके भी उमड़ते रहे है।

थक के सोए थे हम खुद के बिस्तर पे इक रात की,
हर रोज़ बदलते इश्क़ में नाज़ से जिंदा जगते रहे है।

अहबाब बन हम उनके रहगुज़र से गुज़रते रहे है,
तमन्ना थी की उसके हो सके मगर जलते रहे है।

यूं तो वो करती थी बे-पनाह मोहब्बत हमसे की,
तबियत बिगड़ने पर फ़रेब-ए-जन्नत-ए-फ़र्दा सुनते रहे है।

जबसे सच्चाई से उसूलों का सामना हुआ खटकाते रहे है,
गजलों से ज्यादा इन्हीं सवालों में हम सँवरते रहे है।

देखे हैं अंजाम फिर भी उसको चाह कर डरते रहे है,
कुछ बदलेगा नहीं फिर भी गलती खुद की जानते रहे है।

दूर कहीं है फैसले सारे मेरे जो उसके दावा से बिखरते रहे है,
जानता हूं कुछ से कुछ ज्यादा तभी तो खुदा से लड़ते रहे है।


                                                By— Pradeep Yadav



अहबाब;
friends, lovers, dear ones
मित्र, दोस्त, प्रिय जन
'हबीब' का बहु., मित्र लोग, दोस्त, अहवाब ।।

अहबाब;
Arabic ; Noun, Masculine, Plural
friends, dear ones, lovers

रहगुज़र;
Persian ; Noun, Feminine
रास्ता, पथ, मार्ग

फ़रेब-ए-जन्नत-ए-फ़र्दा;
deception of heaven tomorrow

क़ज़ा;
Arabic ; Noun, Feminine
an omitted prayer or fast,
administration of justice, judgement, decree, divine order
death

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