वो मुझे मिले~

तेरी हँसी में जैसे रूह को सुकून मिले,
हर सांस में मुझे तेरा जुनून मिले।

तेरी झील सी आँखों में ऐसा नूर है,
जिसमें डूब कर मुझे खुद का वजूद मिले।

कहूँ क्या तुझसे, तू मेरी धड़कन में बसी,
तेरी बाहों में जैसे मुझे अमन मिले।

तेरा नाम जुबां पे आए तो हो जाऊँ ख़ुदा,
इस इश्क़ में मुझे खुद की पहचान मिले।

तेरी जुल्फों की छाँव में जैसे शाम ढले,
उन घनी रातों में मुझे आराम मिले।

तेरी बातों में वो खामोशी छुपी हुई है,
जैसे वीराने में कोई पनाह मिले।

तेरी चाल में जैसे बहार की रवानी हो,
तेरे पहलू में मुझको जहाँन मिले।

तू खामोश रहे, फिर भी सब कुछ कह जाए,
तेरी खामोशी में मुझे पैगाम मिले।

तेरे इश्क़ में खोकर मैं खुद को पा जाऊँ,
तेरी बाहों में जैसे हर राह मिले।

तेरी महक से भर जाए हर सुबह मेरी,
तेरे ख्वाबों में मुझे हर शाम मिले।

तेरी निगाहों में गहराई का आलम ऐसा,
जैसे समंदर के किनारे किनारों को नाम मिले।



                                             - प्रदीप यादव

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