ख़्वाब ~

घरौंदे ख़्वाबों के पन्नों में जिंदगी थी कहीं,
कभी वो महबूब वाली बात रख लेता होगा।
अगर मैं ही तुमसे कही ये रास्ता ठीक नहीं,
तो वो क़ाफ़िले-ए-मोहब्बत पर अस्फ़ार लेता होगा।
इक तेरे आने से वस्ल साबिर हैं मेरे,
कोई मेरे रिश्तों में झांके तो उसे नीहार लेता होगा।
जब आती होगी हिचकियां मेरे नाम से उसे,
ख़ाल-ओ-ख़द कोई तो मेरा दीदार लेता होगा।
अगर ये सोचकर इश्क़ किया की जंग-ए-मोहब्बत है ये,
 इश्क़ का जुनून इश्क़ ही उतार लेता होगा।
उसके लहजे में आराम मिलता है की जरूर वो,
खाने में आज कल कुछ सुकवार लेता होगा।
देख लेता वो अगर रुख़ की तजल्ली मेरी तो,
शीशा भी तेरे तिलिस्मात ही प्यार लेता होगा।
तेरे हिस्से का शख़्स लिख के ये कहता है क़लम,
तेरी आँखों से मुक़द्दर भी शश-कार लेता होगा।


                                                            By~ प्रदीप यादव 


साबिर
patient, person with fortitude
वस्ल
meeting, connection, union
सुकवार
delicate, feeble, tender, soft
नीहार
कुहर, धुंद
इस्दार
proclamation
ख़ाल-ओ-ख़द
चेहरा मोहरा, स्वरूप, शक्ल-ओ-सूरत की बनावट, हुलिया।
अस्फ़ार
यात्रा करना, यात्राएँ
शश-कार
आवाज़, आवाज़ की पुनरावृत्ति, किसी को चुप कराने या संबोधित करने की आवाज़।
तजल्ली
चमक, प्रकाश, रौशनी, तेज, नूर, आभा, प्रताप, जलाल, अध्यात्मज्योति, परदा हटना, दर्शन, प्रकट होना, झाँकी; चमक-दमक, झलक, वह ईश्वरीय प्रकाश जो तूर पर्वत पर पैग़म्बर मूसा को दिखाई पड़ा था।
बर-गश्ता
(शाब्दिक) फिरा हुआ, प्रतिकूल, , बाग़ी, विद्रोही
(अर्थात) अवज्ञाकारी, उदंड, सरकश, विरोधी।
तिलिस्मात
अद्भुत या अलौकिक काय। चमत्कार। करामात। जादू।
‘तिलिस्म’ का बहु., माया- रचित स्थान, मायाजाल।

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