मोहब्बत~
मुझे तुम्हारी मोहब्बत में रातें कितनी खुमारी लगे,
उम्र की बहारें ये हसीन मुझको तेरे संग गुज़ारी लगे।
बुलबुलों की तरह दिल गुनगुनाए बस तेरे लिए,
तेरी मुस्कान पे हर ग़ज़ल भी मुझको प्यारी लगे।
रातों की रौशनी में निगाह-ए-हसरत बाद-ए-बहारी लगे,
चाँदनी बनकर चमकती है बातें तो कभी छुरी कटारी लगे।
कोई दम में भरे आहें तो कोई उसे देख कुँवारी लगे,
उसने देखा कि हमने मारी आँख फिर दीन-दारी लगे।
क्या रसीली है क्या है प्यारी आँखे की शिकारी लगे,
यक़ीनन सपनों की मल्लिकाए भी तुम्हारी हज़ारी लगे।
देखो तो कैसे शौक़ हैं की कैफ़ियत भी प्यारी लगे,
मोहब्बत में हर क़दम हर लम्हा अब तो ख्वाबी लगे।
मुसलसल ही हर नफ़स का गुज़रना भी भारी लगे,
गुज़ारे कुछ संग मगर गुज़ारने बैठे तो उम्र सारी लगे।
इलाज 'प्रदीप' के उदासियों का ये है की वो भी तुम्हारी लगे,
मोहब्बत ब्योपार तो वोही ग़र उनका 'प्रदीप' मदारी लगे।
By— प्रदीप यादव
बाद-ए-बहारी~ बसंत ऋतु की सुगंधित और शीतल वायु
निगाह-ए-हसरत~ हसरत भरी नज़र
हज़ारी~ हज़ार सिपाहियों का सरदार, मुगल शासन में सरदारों को दिया जाने वाला एक ओहदा।
दीन-दारी~ दीनदार होने की अवस्था या भाव, अपने धर्म पर विश्वास, धार्मिक कार्यों की पाबंदी, परहेज़गारी, धर्मानुकूल आचरण या व्यवहार करने का भाव, धार्मिकता।
कैफ़ियत~ हालत, समाचार, हाल, दशा, हालत, हर्ष, आनन्द, सुरूर, मस्ती, नशा, रिमार्क, नोट, वज्द, हाल, ‘कैफ़ीयते-चश्म उसकी मुझे याद है ‘सौदा'।
ज़ख़्म-ए-कारी~ ऐसा घाव जिससे हलाकत का ख़तरा हो, मोहलिक ज़ख़म, गहरा घाव, भरपूर घाव।
फ़रोख़्त~ बेचने की क्रिया या भाव, बिक्री, विक्रय।
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