इश्क़ के सफ़र में: एक मुसाफ़िरी हैं हम~
इश्क़ की राहों में भटकते-भटकते,
ज़मीं की गोद में समाए हुए हैं हम।
सितारों की रौशनी देती है उम्मीदें,
कि इश्क़ के रास्तों में मिल जाए हम।
जैसे नदियों को मिलता है सागर,
वैसे ही दिलों को मिलना चाहते हैं हम।
प्यार की लहरों में बहते-बहते,
एक-दूजे के बन जीना चाहते हैं हम।
मोहब्बत का आगाज़ है मुसाफ़िरी,
हर क़दम पर नए मंज़िलों की तलाश हैं हम।
पास होते हैं फिर भी दूर लगते हैं,
इस इश्क़ की राह में अजनबी आश हैं हम।
मुसाफिर हो गए हैं दिल के बाग़ में,
ख़्वाबों के परिंदों की उड़ान हैं हम।
प्यार के पहाड़ों को छूने की है तमन्ना,
मगर राहों में उलझे हुए मुसाफ़िरान हैं हम।
इश्क़ के सफ़र में खो जाते हैं हम,
ज़िंदगी के संगीत में रंग जाते हैं हम।
चाहत की उड़ान पकड़ते ही चल पड़े,
अब ज़माने के दरिया में तैर जाते हैं हम।
हर इक रात में चमकते हैं चाँद,
इश्क़ की रातों में चांदनी बन जाते हैं हम।
अपनी जुबां से कह देते हैं कहानी की,
इश्क़ के शेरों में अदा बन जाते हैं हम।
हर ज़मीन के नीचे छुपी हैं ख़्वाहिशें,
मुसाफ़िरों की नज़रों में बस जाते हैं हम।
सितारों के आगे जगमगाते हैं हम,
अपनी आँखों में तारे छुपाते हैं हम।
इश्क़ की राहों में गुम हुए हैं हम,
दिल की धड़कनों में बसे हुए हैं हम।
प्यार की आग में जलते हैं ज़रूर,
इश्क़ के ज़ालिमों से बचते हुए हैं हम।
By— प्रदीप यादव
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