umeed

तेरे  वापस आने की कोई उम्मीद नहीं ,
 और मेरे जीने की कोई उम्मीद नहीं।
एक किनारे पे तू और दूसरे पे मेरी माँ ,
  और बीच  में मेरी मौत खड़ी।
    बुला रहा है अल्लाह मुझे आज ,
और मेरे वापस आने की कोई उम्मीद नहीं।
   
                           By:— Pradeep Yadav

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